वापसी पर वापसी पर
कैसा पागलपन है 'कुमार' सोच ज़रा, क्यों तू ख़ुद को इतना ज्यादा सताता है। कैसा पागलपन है 'कुमार' सोच ज़रा, क्यों तू ख़ुद को इतना ज्यादा सताता है।
पर समझने वाला कौन वहाँ कभी बैठे, किस्मत को कोसे, कभी फड़फड़ाते, परों को रोके..... पर समझने वाला कौन वहाँ कभी बैठे, किस्मत को कोसे, कभी फड़फड़ाते, परों को रोके.....
तनिक भी न हम घबराएं दे और शान्त मन परीक्षा, सदा ही पढ़ी और सुनी है हम सबने ही ये शिक्ष तनिक भी न हम घबराएं दे और शान्त मन परीक्षा, सदा ही पढ़ी और सुनी है हम सबने ही...
वो जो झील को अपनी दोनों आँखों में रखती है , वो ही तो गुलाबों को अपने दोनों रूख़ वो जो झील को अपनी दोनों आँखों में रखती है , वो ही तो गुलाबों को अप...
इतिहास वीर पुरुषों के नाम याद करता है, और इतिहास उन पुरुषों के पीछे महिलाओं की भूमिका इतिहास वीर पुरुषों के नाम याद करता है, और इतिहास उन पुरुषों के पीछे महिलाओं ...